Tue. Feb 20th, 2024

हनुमान धारा चित्रकूट धाम में बाँदा जिले के कर्वी तहसील और मध्य प्रदेश के सतना जिले के बीच में स्थित है कहते है जब हनुमान जी लंका जला कर लौटे तो उनके शरीर पर जलन हो रही थी फिर उन्होंने अपनी ब्यथा प्रभु श्री राम से बताई तो प्रभु श्री राम की कृपा से एक जल धरा प्रकट हुयी जहा हनुमान जी को शीतलता मिली आज भी धारा का दर्शन होता है ऊपर चढाई पर सीता माता की रसोई है जहां उन्होंने ऋषियों का भोजन बनाया था
हनुमान धारा के बारे में कहा जाता है की जब श्री हनुमान जी ने लंका में आग लगाई उसके बाद उनकी पूंछ में लगी आग को बुझाने के लिए वो इस जगह आये जिन्हे भक्त हनुमान धारा कहते है | यह विन्ध्यास के शुरुआत में राम घाट से 4 किलोमीटर दुर है | एक चमत्कारिक पवित्र और ठंडी जल धारा पर्वत से निकल कर हनुमान जी की मूरत की पूँछ को स्नान कराकर निचे कुंड में चली जाती है | कहा जाता है की जब हनुमानजी ने लंका में अपनी पूँछ से आग लगाई थी तब उनकी पूँछ पर भी बहूत जलन हो रही थी | रामराज्य में भगवन श्री राम से हनुमानजी विनती की जिससे अपनी जली हुई पूँछ का इलाज हो सके | तब श्री राम ने अपने बाण के प्रहार से इसी जगह पर एक पवित्र धारा बनाई जो हनुमान जी की पूँछ पर लगातार गिरकर पूँछ के दर्द को कम करती रही | यह जगह पर्वत माला पर है |

चित्रकूट का मुख्य स्थल सीतापुर है जो कर्वी से आठ किलोमीटर की दूरी पर है। उत्तर प्रदेश के सीतापुर नामक स्थान के समीप यह हनुमान मंदिर स्थापित है।

सीतापुर से हनुमान धारा की दूरी तीन मील है। यह स्थान पर्वतमाला के मध्यभाग में स्थित है। पहाड़ के सहारे हनुमानजी की एक विशाल मूर्ति के ठीक सिर पर दो जल के कुंड हैं, जो हमेशा जल से भरे रहते हैं और उनमें से निरंतर पानी बहता रहता है। पहाड़ी के शिखर पर स्थित हनुमान धारा में हनुमान की एक विशाल मूर्ति है। मूर्ति के सामने तालाब में झरने से पानी गिरता है
आप माता सीता के बर्तन देख सकते हैं जिनका उपयोग वह खाना पकाने के लिए करती थीं। इस स्थान पर कई मंदिर हैं लेकिन सीता रसोई मुख्य है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *